सिंगरौली। जिले के सरई थाना क्षेत्र में इन दिनों नशे का अवैध कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। शराब और नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री ने युवाओं की जिंदगी को खतरे में डाल दिया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब गाँव और कस्बों में छोटे बच्चे भी इस लत की चपेट में आ रहे हैं। जहाँ उनके हाथों में किताबें और कॉपियाँ होनी चाहिए थीं, वहीं अब शराब की बोतलें और सिगरेट देखी जा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब थाना प्रभारी सरई के संरक्षण में चल रहा है। खुलेआम बिक रहे नशे के सामानों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस चौकी और थाने के पास ही अवैध शराब की बिक्री होती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। मुख्यमंत्री के आदेश की अनदेखी प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि मध्य प्रदेश में नशे का नेटवर्क पूरी तरह से ध्वस्त किया जाए, और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए।” लेकिन सरई थाना प्रभारी पर मुख्यमंत्री के इस आदेश का कोई असर नहीं दिख रहा। बल्कि आरोप यह है कि थाना प्रभारी नशे के कारोबारियों को संरक्षण दे रहे हैं और स्थानीय स्तर पर नशे का जाल लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश सरई और आसपास के गाँवों में लोगों में भारी नाराज़गी है। माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। लोगों का कहना है कि जब प्रशासन ही लापरवाह होगा, तो समाज में सुधार कैसे होगा? ग्रामीणों ने इस संबंध में कई बार शिकायतें भी दर्ज करवाई हैं, लेकिन नतीजा “शून्य” रहा है। जिम्मेदारी से भागते अधिकारी सूत्रों के मुताबिक थाना प्रभारी को कई बार मौखिक निर्देश दिए गए, परंतु अभी तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अवैध शराब और नशीले पदार्थों की बिक्री न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। देखिए कप्तान साहब, आपके थाना प्रभारी क्या कर रहे हैं! अब जनता की नज़रें सिंगरौली पुलिस कप्तान पर टिकी हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि कप्तान साहब स्वयं मामले का संज्ञान लेकर नशे के इस गंदे नेटवर्क को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाएँगे। यदि अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला सीधे डीआईजी रीवा रेंज और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुँचने की संभावना है। जनता की मांग जनता का एक ही सवाल है जब मुख्यमंत्री खुद आदेश दे चुके हैं कि नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस अपनाया जाए, तो फिर सरई थाना में ये आदेश क्यों नहीं चल रहे?” लोगों की मांग है कि थाना प्रभारी सरई के खिलाफ तुरंत जांच और निलंबन (सस्पेंशन) की कार्रवाई की जाए, ताकि जिले में कानून का भय और प्रशासन की साख दोबारा कायम हो सके।