🚨 डिजिटल इंडिया पर दिनदहाड़े डाका! पीएम-सीएम की आधार सेवा योजना को पलीता लगाता “रीति ऑनलाइन एवं प्रिंटिंग प्रेस, बरगवां” जन्मतिथि सुधार के नाम पर अवैध वसूली, सिस्टम की चुप्पी पर गंभीर सवाल सिंगरौली / बरगवां। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जिस आधार सेवा व्यवस्था की शुरुआत आम जनता को राहत देने, पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार खत्म करने के उद्देश्य से की थी, वही व्यवस्था आज जमीनी स्तर पर लूट और मनमानी का जरिया बनती दिखाई दे रही है। बरगवां स्थित “रीति ऑनलाइन एवं प्रिंटिंग प्रेस – आधार सेवा केंद्र” में सामने आया ताजा मामला सरकार की डिजिटल योजनाओं पर सीधा हमला माना जा रहा है। यह मामला सिर्फ एक महिला उपभोक्ता से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह उस पूरे सिस्टम की पोल खोलता है, जो सरकारी अनुमति की आड़ में आम नागरिकों की मजबूरी को भुनाने में लगा हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक महिला अपने आधार कार्ड में जन्मतिथि सुधार कराने के लिए रीति ऑनलाइन एवं प्रिंटिंग प्रेस, बरगवां पहुंची थी। UIDAI के पोर्टल के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की गई और ₹125 की सरकारी रसीद भी दी गई। यहीं तक सब कुछ नियमों के मुताबिक था। लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह सरकारी नियमों और नैतिकता — दोनों पर करारा तमाचा है। आरोप है कि आधार सेवा केंद्र के ऑपरेटर विनोद कुमार बैस ने रसीद देने के बावजूद महिला से ₹200 की अतिरिक्त राशि की मांग की। जब उपभोक्ता ने विरोध किया, तो “नियम”, “चार्ज” और “यही सिस्टम है” जैसे शब्दों का सहारा लेकर जबरन वसूली की गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि — जब UIDAI ने आधार अपडेट का शुल्क पहले से तय कर रखा है, तो यह अतिरिक्त पैसा किसके आदेश पर और किसकी जेब में जा रहा है? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। बरगवां क्षेत्र में रीति ऑनलाइन एवं प्रिंटिंग प्रेस को लेकर पहले भी फुसफुसाहट होती रही है कि आधार से जुड़े कामों में तय शुल्क से ज्यादा वसूला जाता है। लेकिन आधार जैसी अनिवार्य पहचान के कारण लोग मजबूरी में चुप रह जाते हैं। प्रधानमंत्री ने आधार सेवा को “डिजिटल इंडिया” की रीढ़ बताया था और मुख्यमंत्री ने इसे अंतिम व्यक्ति तक सुविधा पहुंचाने का माध्यम। मगर अगर अधिकृत आधार सेवा केंद्र ही सरकारी नियमों को ठेंगा दिखाने लगें, तो यह न सिर्फ आम जनता के साथ धोखा है, बल्कि सीधे-सीधे सरकार की साख पर सवाल है। यह मामला प्रशासनिक निगरानी पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। क्या जिला प्रशासन को इस केंद्र की गतिविधियों की जानकारी नहीं? क्या आधार सेवा केंद्रों की नियमित जांच सिर्फ कागजों तक सीमित है? या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं? नियम बिल्कुल साफ हैं— आधार अपडेट के लिए UIDAI द्वारा तय शुल्क के अलावा एक रुपया भी लेना गैरकानूनी है। इसके बावजूद यदि बरगवां में खुलेआम अतिरिक्त वसूली हो रही है, तो यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सिस्टम फेलियर है। अब जनता पूछ रही है क्या “रीति ऑनलाइन एवं प्रिंटिंग प्रेस, बरगवां” पर कार्रवाई होगी? क्या ऑपरेटर विनोद कुमार बैस के खिलाफ जांच बैठेगी? क्या आधार सेवा केंद्र का लाइसेंस रद्द होगा या मामला फिर ठंडे बस्ते में जाएगा? स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की तत्काल और निष्पक्ष जांच कराई जाए, सीसीटीवी फुटेज, ऑनलाइन लॉग और रसीदों की जांच हो, और दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की योजनाएं जमीन पर मजाक न बनें। यह मामला एक चेतावनी है— अगर आज आधार सेवा केंद्रों की मनमानी पर लगाम नहीं लगी, तो कल हर सरकारी सेवा आम जनता के लिए लूट का नया रास्ता बन जाएगी। अब सवाल सिर्फ एक दुकान का नहीं, पूरे सिस्टम की ईमानदारी का है। देखना यह है कि प्रशासन जागता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।