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SINGRAULI NEWS:चौकी प्रभारी की कार्यशैली से उलझे सीएम–डीजीपी के निर्देश, सीएसपी की खामोशी में दम तोड़ता ‘नशे का प्रहार 2.0’

प्रदेश सरकार और पुलिस मुख्यालय द्वारा नशे के खिलाफ जारी

गूंज सिंगरौली | विशेष रिपोर्ट

प्रदेश सरकार और पुलिस मुख्यालय द्वारा नशे के खिलाफ जारी सख्त निर्देश सिंगरौली जिले के शासन चौकी क्षेत्र में कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं। रीवा रेंज के आईजी द्वारा संचालित “नशे का प्रहार 2.0” अभियान की मंशा भले ही सख्त हो, लेकिन जमीनी हकीकत इस अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रही है।

आदेश एक तरफ, हालात दूसरी तरफ

शासन चौकी क्षेत्र में गांजा, हीरोइन सहित अन्य नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार अब भी बेधड़क जारी है। यह स्थिति तब है, जब मुख्यमंत्री और डीजीपी स्तर से नशे पर जीरो टॉलरेंस की नीति साफ तौर पर घोषित की जा चुकी है। इसके बावजूद क्षेत्र में नशे की उपलब्धता में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं दिख रही।

चौकी स्तर पर अमल क्यों कमजोर?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अभियान की चर्चा तो ऊपर तक है, लेकिन चौकी स्तर पर उसकी गंभीरता दिखाई नहीं देती। नशा कारोबारियों की निर्भीक गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि या तो निगरानी ढीली है या फिर निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

सीएसपी की भूमिका पर भी उठे सवाल

क्षेत्रीय पुलिस पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी संभाल रहे सीएसपी की भूमिका भी चर्चा में है। लगातार सामने आ रही गतिविधियों के बावजूद सख्त कदम न उठना, पुलिस व्यवस्था के भीतर समन्वय की कमी को उजागर करता है। यही वजह है कि शासन चौकी क्षेत्र में नशा कारोबारियों के हौसले कम होने का नाम नहीं ले रहे।

युवा वर्ग सबसे अधिक प्रभावित

नशे का सीधा असर क्षेत्र के युवाओं पर पड़ रहा है। पढ़ाई और रोजगार से भटकते युवा, चिंतित अभिभावक और बिगड़ता सामाजिक माहौल—ये सब प्रशासनिक निष्क्रियता की गंभीर चेतावनी माने जा रहे हैं।

जनता में बेचैनी, भरोसा कमजोर

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अभियान को ईमानदारी और सख्ती से लागू किया जाता, तो स्थिति कुछ और होती। लगातार अनदेखी से आमजन का भरोसा डगमगाने लगा है।

अब निगाहें एसपी की कार्रवाई पर

अब शासन चौकी क्षेत्र की जनता की उम्मीदें सिंगरौली पुलिस अधीक्षक पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि यदि उच्चस्तर से सीधी निगरानी और जवाबदेही तय की गई, तो नशा नेटवर्क पर वास्तविक शिकंजा कस सकता है।

अब सवाल यही है—

  • क्या ‘नशे का प्रहार 2.0’ सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेगा?
  • क्या चौकी और पर्यवेक्षण स्तर पर जवाबदेही तय होगी?
  • या शासन चौकी क्षेत्र यूं ही नशा कारोबार का सुरक्षित इलाका बना रहेगा?

जवाब आने वाले दिनों की पुलिस कार्रवाई तय करेगी।

नोट: खबर में प्रयुक्त फोटो सांकेतिक है।

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इण्डिया टीवी एमपी तक

लाले विश्वकर्मा, "इंडिया टीवी एमपी तक" डिजिटल न्यूज़ पोर्टल के प्रधान संपादक और संस्थापक सदस्य हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष एवं जनसेवा भाव से समाचार प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं।

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