बेटी- मैं पड़ोसी से प्यार करती हूं और भाग रही हूं उसके साथ… पिता- थैंक गॉड… मेरा वक्त और पैसे दोनों बच गए…! बेटी- पापा, मैं लेटर पढ़ रही हूं, जो मां रख के गई है… पिता बेहोश. पिता- कहां हो बेटा? संता- हॉस्टल में हूं और पढ़ रहा हूं, एग्जाम बहुत नजदीक हैं, इसलिए बहुत पढ़ना पड़ता है. आप कहां हो? पिताजी- ठेके पे, तेरे पीछे लाइन में लास्ट में खड़ा हूं, एक हाफ मेरा भी ले लेना. पति- कमर में बहुत दर्द है. जरा मिश्रा जी के घर से आयोडेक्स ले आओ. पत्नी- अरे वो नहीं देंगे, बहुत कंजूस हैं. पति – हां हैं तो खानदानी कंजूस हैं, पता नहीं इतने पैसे लेकर कहां जाएंगे. मर जाएंगे यूं ही, ऐसा करो अलमारी से तुम अपनी ही निकाल लो, दर्द कुछ ज्यादा ही है. पति (किताब पढ़ते हुए) – एक लेखक ने लिखा है कि पतियों को भी बोलने की आजादी होनी चाहिए. पत्नी (हंसते हुए)- देखो वो भी बेचारा लिख ही पाया, बोल नहीं पाया. डॉक्टर ने एक मरीज की उंगलियों पर प्लास्टर कर दिया. मरीज- मेरा तो आंख का ऑपरेशन हुआ है तो आपने मेरी उंगली का प्लास्टर क्यों किया? डॉक्टर- ताकि तुम फेसबुक और व्हाट्सेप न चला सको और तुम्हारी आंखों को आराम मिले. इंडिया टीवी एमपी तक न्यूज नेटवर्क पर