सिंगरौली जिले के जियावन थाना क्षेत्र में पशु तस्करी का नेटवर्क खुलेआम सक्रिय बना हुआ है। स्थानीय लोगों द्वारा भेजी गई वीडियो क्लिप और तस्वीरों के अनुसार तस्करों का बेखौफ रवैया सामने आया है। जब ग्रामीणों ने उनकी गतिविधियों की फोटो और वीडियो लीं, तो तस्करों ने खुलेआम कहा — “जो करना है कर लो, जहां छापना है छाप दो… यह कारोबार हमसे करवाया जाता है, हम किसी से नहीं डरते। गांधी छाप लाल-पीले नोटों का चढ़ावा हर महीने जियावन थाना के कारखासों को देते हैं।” तस्करों का यह बयान थाने की कार्यप्रणाली और विश्वास पर सीधा सवाल खड़ा करता है। ऊपर ‘जीरो टॉलरेंस’ की घोषणाएँ… पर जमीनी स्तर पर कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है। जहाँ शीर्ष स्तर पर लगातार “जीरो टॉलरेंस” की बात की जाती है, वहीं जियावन थाने की हकीकत बताती है कि आदेश ऊपर बनते हैं और नीचे पहुँचते-पहुँचते उनका असर हवा हो जाता है। नीतियाँ कागज़ पर सख्त हैं, पर जियावन थाने में नियमों की नहीं, तस्करों की चल रही है। यह हालात बताते हैं कि जीरो टॉलरेंस की नीति सिर्फ भाषणों में कड़क है, ज़मीन पर बिल्कुल ढीली। थाना प्रभारी साहिबा ट्रेनिंग में मौजूद, लेकिन तस्करों की रफ्तार और तेज! सूत्रों के अनुसार, थाना प्रभारी साहिबा इन दिनों जियावन थाने में ट्रेनिंग पर मौजूद हैं, फिर भी तस्करी जारी है, नेटवर्क सक्रिय है और कार्यवाही का कोई ठोस असर दिखाई नहीं दे रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि थाने के कारखास और कर्मचारी पूरी तरह हालात संभालने में विफल साबित हो रहे हैं। जनता में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण कहते हैं — “कागज़ी आदेशों से क्या होगा?” वे कहते हैं कि तस्करों को किसी चीज़ का डर नहीं है और कार्यवाही का नाम नहीं दिखता। उच्चस्तरीय जांच की मांग ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि यह नेटवर्क किसके संरक्षण में चल रहा है और कथित “गांधी छाप लाल-पीले नोटों का चढ़ावा” किन तक पहुँचता है। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि क्या थाने में कानून-व्यवस्था लागू करने की सही नीयत और संसाधन मौजूद हैं। नोट: यह रिपोर्ट स्थानीय सूत्रों द्वारा प्राप्त जानकारी पर आधारित है।