देवसरमुद्दे की बात लाले विश्वकर्मा के साथसिंगरौली

“जब रखवाले ही सो जाएँ…”—सीएम मोहन यादव और डीजीपी कैलाश मकवाना के आदेश हवा में, जियावन थाने में नशा-रेत-कबाड़ माफिया बेखौफ

सिंगरौली।

कहावत है—“जब रखवाले ही सो जाएँ, तो चोरी का डर किसे?”
यह कहावत सिंगरौली जिले के जियावन थाना क्षेत्र पर पूरी तरह फिट बैठती नजर आ रही है।
यहां ट्रेनिंग पर आई थाना प्रभारी साहिबा को कमान संभाले करीब तीन–चार महीने बीत चुके हैं,
लेकिन इस दौरान कानून व्यवस्था मजबूत होने के बजाय नशा, अवैध रेत और कबाड़ माफिया
पहले से ज्यादा बेखौफ हो गए हैं।

थाने के बगल में अफसरों का दफ्तर, सामने से गुजरता “अवैध मेला”

सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाली बात यह है कि जियावन थाना के ठीक बगल में एसडीओपी कार्यालय
मौजूद है, जहां गायत्री तिवारी पदस्थ हैं। लेकिन हालात यह हैं कि उसी दफ्तर के सामने से
रेत से लदे ट्रैक्टर, हाईवे रेट पर दौड़ते वाहन, कबाड़ से भरे ट्रक और नशे का सामान
ऐसे गुजरते हैं, जैसे उन्हें किसी का डर ही न हो

स्थानीय लोग तंज कसते हुए कहते हैं—
“यहां आंखों पर पट्टी नहीं, पूरे सिस्टम पर पर्दा पड़ा हुआ है।”

नशे की गलियां आबाद, चोरी की घटनाएं आज़ाद

जियावन क्षेत्र में हीरोइन, गांजा, अवैध शराब की पाइकारी, कबाड़ का संगठित कारोबार और
चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हालात यह हैं कि—

  • नशे के सौदागर खुलेआम घूम रहे हैं
  • कबाड़ माफिया दिनदहाड़े सक्रिय हैं
  • आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है

लेकिन कार्रवाई के नाम पर खामोशी और खुला संरक्षण
चर्चा का विषय बना हुआ है।

सीएम–डीजीपी के निर्देश, जमीनी हकीकत शून्य

प्रदेश के मुखिया मोहन यादव लगातार अवैध नशे और माफियाओं के खिलाफ
सख्त कार्रवाई के निर्देश देते रहे हैं।
वहीं प्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना
भी अपराध नियंत्रण को लेकर कड़े आदेश जारी करते हैं।

लेकिन जियावन थाना क्षेत्र में इन निर्देशों का असर ऐसा दिखता है, जैसे—
“आदेश ऊपर से आते हैं और नीचे आते-आते गुम हो जाते हैं।”

अभियान कागजों में, माफिया मैदान में

भले ही नशे के खिलाफ बड़े-बड़े अभियान चलाए जा रहे हों,
लेकिन जियावन की जमीनी तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
यहां माफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत है कि
कानून का डर खत्म और
हौसले सातवें आसमान पर हैं।

‘ट्रेनिंग जोड़ी’ पर उठते तीखे सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—

  • ट्रेनिंग पर आई थाना प्रभारी साहिबा की प्राथमिकता क्या है?
  • एसडीओपी स्तर पर निगरानी आखिर क्यों नाकाम साबित हो रही है?
  • क्या यह सिर्फ अनुभव की कमी है या फिर “सब ठीक है” का मौन समर्थन?

जनता का सवाल—कार्रवाई कब होगी?

जियावन की जनता आज यही पूछ रही है—
“अगर थाने और एसडीओपी दफ्तर के सामने ही अवैध कारोबार चलता रहे,
तो फिर कानून का राज कहां है?”

अब देखना यह है कि क्या सिंगरौली प्रशासन और पुलिस मुख्यालय इस कहावत को झुठलाते हुए
वाकई कार्रवाई करेगा, या फिर जियावन की यह कहानी भी साबित करेगी कि—“जहां रखवाले ही चैन की नींद सोए हों, वहां लुटेरों को चौकीदारी की जरूरत नहीं पड़ती।”
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इण्डिया टीवी एमपी तक

लाले विश्वकर्मा, "इंडिया टीवी एमपी तक" डिजिटल न्यूज़ पोर्टल के प्रधान संपादक और संस्थापक सदस्य हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष एवं जनसेवा भाव से समाचार प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं।

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